बुधवार 14 जनवरी 2026 - 12:10
इस्लामी गणतंत्र ईरान का निज़ाम अल्लाह की अमानत है फ़तवा यही है कि दंगाईयो और ग़बन करने वालो के रुस्वा करें

हौज़ा हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली ने कहाः इस्लामी गणतंत्र ईरान का निज़ाम एक इलाही नेमत है जो आजकल हमारे हाथो मे है और इंशाल्लाह हज़रत वील अस्र (अ) के ज़ोहूर तक सुरक्षित रहेगा यहा तक कि खुद उसके असली वारिस के हवाले कर दिया जाए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली ने अपनी फ़िक़्ह की कक्षा मे कहाः इस्लामी गणतंत्र ईरान का निज़ाम हमारे हाथो मे अल्लाह की अमानत है।

उन्होने कहाः इंशाल्लाह इस्लामी निज़ाम हज़रत वील अस्र (अ) के ज़ोहूर तक सुरक्षित रहेगा और हम यह अमानत उसके असल वारिस के हवाले करेंगें।

मरजा ए तक़लीद ने कहा हज़रत वील अस्र (अ) ग़ायब है, का अर्थ यह कदापि नही कि वह मौजूद नही या कही आसमानो मे है या किसी दूसरे ब्रहम्राण मे है बल्कि इसका अर्थ यह है कि वह तो मौजूद है लेकिन हम उन्हे नही देख सकते। वह हमारे सभी कर्मो से अवगत है अतः ऐसा कोई काम नही करना चाहिए जिससे वह परेशान हो और या जिस से हम उनकी दुआओ से वंचित रह जाए।

उन्होने आगे कहा कि इमामत और उम्मत के निज़ाम का फ़र्ज़ अज्ञानता की समाप्ति है, हौज़ा ए इल्मिया और यूनिवर्सिटी का काम भी अज्ञानता को दूर करना है और इसी तरह इमाम बारगाहो और धार्मिक संगठनो का काम भी अज्ञानता की समाप्ति है और याद रहे कि यह बुनियादी और अत्यधिक आवशयकत है।

आयतुल्लाह जावदी आमोली ने हालिया दंगो और उसके कारको की ओस इशारा करते हुए कहा यही फ़तवा है कि दंगाईयो, भ्रष्टाचारीयो और फ़साद और ग़बन करने वालो को रुसवा करें।

उन्होने आगे कहा कि अखल़ाक़ी और सार्वजिनक निज़ाम मे अगर कोई खिलाफ या ग़लत काम करता है तो हमे हुक्म है कि हम व्यक्ति का नाम न ले और उसकी ग़ीबत (चुगली) न करं ताकि उसको अपमानित न होना पड़े लेकिन मरहूम आख़ूंद खुरासानी फ़तवा देते है कि जिसने फ़साद किया हो या ग़बन किया हो तो सरकार पर फर्ज़ है कि उस को ज़ाहिर करे और ऐसे व्यक्ति को अपमानित करें।

मरज़ा ए तक़लीद ने अंत मे देश और जनता की सुरक्षा की दुआ करते हुए कहा कि अमेरिका और इजराइल जान ले कि हम इब्राहीम खलीलुल्लाह की मिल्लत है कि जो ख़ुद भी शांत थे और दूसरो के लिए भी शांति चाहते थे।

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